Saturday, September 23, 2017
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वित्त मंत्री ने दिया है भरोसा, खादी उत्पादों और बुनकरों को मिलेगी GST से छूट | कलराज मिश्र


मिश्रा ने बताया कि जीएसटी परिषद जीएसटी से खादी उद्योग, बुनकरों और स्पिनरों पर क्या प्रभाव पड़ा है, देख रही है। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री ने मुझसे, आर्थिक रूप से पिछड़े बुनकरों और स्पिनरों (सूत कातने वाला) के वित्तीय विकास के लिए उन्हें जीएसटी छूट देने का आश्वासन दिया है।


केंद्रीय एमएसएमई मंत्री कलराज मिश्रा ने खादी उत्पादों के गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) से छूट देने की मांग का समर्थन किया है। वह, खादी संस्थान की नई दिल्ली में हुई बैठक को संबोधित कर रहे थे।

इस अवसर पर राज्य एमएसएमई मंत्री गिरिराज सिंह और हरिभाई चौधरी, नव-नियुक्त सचिव अरुण कुमार पांडा और केवीआईसी के अध्यक्ष वी के सक्सेना भी मौजूद थे।

गौरतलब है कि जहाँ एक तरफ खादी यार्न, गांधी टोपी, भारत का राष्ट्रीय ध्वज आदि जीएसटी से बहार रखा गया है और इनपर कोई टैक्स नहीं लगेगा, वहीँ खादी से बने अन्य एपरेल्स और खादी उत्पादों पर 5 फ़ीसदी से लेकर 18 फ़ीसदी तक जीएसटी लगेगा।

जिसमे जीएसटी के तहत खादी पर 5 फीसदी का टैक्स, रेडीमेड खादी से बने कपड़ों पर 12 फीसदी, 1000 रुपये के ऊपर के कपड़ों पर 12  प्रतिशत तथा मिक्स खादी पर 18 फीसदी जीएसटी लगाया गया है।

मिश्रा ने बताया कि जीएसटी परिषद ने विभिन्न उत्पादों पर जीएसटी के पड़ने वाले अच्छे और बुरे प्रभावों का विश्लेषण शुरू कर दिया है। साथ ही जीएसटी से खादी उद्योग, बुनकरों और स्पिनरों पर क्या प्रभाव पड़ा है, इसको भी कौंसिल देख रही है।

मिश्रा ने कहा कि वित्त मंत्री ने मुझसे, आर्थिक रूप से पिछड़े बुनकरों और स्पिनरों (सूत कातने वाला) के वित्तीय विकास के लिए उन्हें जीएसटी छूट देने का आश्वासन दिया है।

खादी को एक वैश्विक ब्रांड के रूप में बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर देते हुए मंत्री ने कहा, “खादी को एक वैश्विक ब्रांड बनाने के लिए, हमने विभिन्न दूतावासों में खादी प्रदर्शनियों को आयोजित करना चाहिए।”

मंत्री ने खादी की अप्रयुक्त परिसंपत्तियों का जितना संभव हो सके उतना उपयोग करने के लिए बैठक में उपस्थित लोगों से आग्रह किया।

एमएसएमई मंत्रालय ने खादी के प्रोडेक्शन में जीएसटी के बाद आयी कमी के चलते वित्त मंत्रालय को खादी को जीएसटी के दायरे से बाहर रखने का प्रस्ताव भेजा है।

जीएसटी लागू होने के समय खादी काउंसिल ने खादी पर जीएसटी लगाने को लेकर आपत्ति जताई थी। काउंसिल का कहना था कि इसके रोज़गार प्रभावित होगा तथा जीएसटी के बाद खादी वस्तुओं की कीमत में वृद्धि होगी।

आजादी की लड़ाई में अपना योगदान देने वाली खादी पर आजादी के पहली बार कर लगाया गया है। जिस कारण खादी उद्योग से जुड़े बुनकर को लागत में कमी का ड़र सता रहा है।

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