Sunday, July 23, 2017
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भारत जल्द चीन को पीछे छोड़ बन सकता है दुनिया की मैन्युफैक्चरिंग फैक्ट्री


GST की तारीफ़ करते हुए चीनी मीडिया ने कहा है कि नए सुधारों की वजह से मोदी देश को मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की तरफ ले जा रहे हैं। भारत पूरी दुनिया में नया इन्वेस्टमेंट हब बनता जा रहा है। इसीलिए चीन को भारत से मिल रहे कम्पटीशन को ध्यान में रखते हुए मैन्युफैक्चरिंग अपग्रेड पर फोकस करना चाहिए।


भारत विश्व की कंपनियों के लिए व्यापार के लिए पसंदीदा गंतव्य बन रहा है। चीनी अखबर ग्लोबट टाइम्स में छपी एक खब़र के अनुसार लो कॅास्ट मैन्युफैक्चरिंग में भारत अपने पड़ोसी मुल्क चीन से आगे निकल रहा है। और आने वाले समय में चीन से मैन्युफैक्चरिंग हब कहलाने का हक छीन लेगा।

खब़र में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि भारत ने यह उपलब्धि बड़े आर्थिक बदलावों के तहत प्राप्त की है। जिसमें जीएसटी और स्टार्टअप को अनकूल वातावरण देना आदि शामिल है।

ग्लोबल टाइम्स लिखता है कि प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 में सत्ता में आने के बाद से देश में मेक इन इंडिया बनाने का नारा दिया था। सरकार ने निवेश व स्टार्टअप्स को बढ़ाने की दिशा में काम किया है। जिसका परिणाम यह है कि फॉक्सकॉन और सैमसंग जैसी दिग्गज कंपनियां भारत में निवेश को प्राथमिकता दे रही हैं।

अखबार ने नई कर व्यवस्था जीएसटी (GST) की तारीफ़ करते हुए लिखा है कि सरकार ने देश को ‘एक मार्केट’ बनाने के मकसद से रिफॉर्म्स को तेजी से लागू किया है।

नई कर व्यवस्था के बारे में अखबार ने कहा है कि यह 1947 के बाद से सबसे बड़ा कर सुधार है। इस नए टैक्स सिस्टम से मेक इन इंडिया को बूस्ट मिलेगा। वहीँ सभी राज्यों और केंद्र के कर मिलाकर एक एकीकृत कर व्यवस्था बनेगी जिससे पूरे देश में एक मार्किट होने से भारत की विनिर्माण प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी।

देश के विभिन्न राज्यों में खराब इन्फ्रास्ट्रक्चर और पॉलिसी लागू करने में संभावित मुश्किलों आएँगी लेकिन उसके बाद भी पूरी दुनिया से इन्वेस्टर्स यहाँ इन्वेस्ट करने आ रहे हैं।

अखबार लिखता है कि ख़बर के मुताबिक फॉक्सकॉन ने भारत में नए कारखानों के निर्माण में 5 अरब यूएस डॉलर तक निवेश करने की योजना बनाई है। वह महाराष्ट्र के पुणे में 2018 तक एक विनिर्माण सुविधा स्थापित करने के लिए 800 करोड़ ($ 123.98 मिलियन) का निवेश करेगी। और इससे 500 नौकरियां पैदा करने का लक्ष्य है। वहीं सैमसंग ने अपने स्मार्टफोन उत्पादन क्षमता का विस्तार करने के लिए भारत में 700 अरब डॉलर ($ 608.28 मिलियन) का निवेश करने जा रही है।

गौरतलब है अखबार पहले भी मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में भारत के बढ़ते प्रभुत्व पर चीन को आगाह कर चूका है। अख़बार ने जनवरी में एक लेख में कहा था कि भारत पूरी दुनिया में नया इन्वेस्टमेंट हब बनता जा रहा है। इसीलिए चीन को भारत से मिल रहे कम्पटीशन को ध्यान में रखते हुए मैन्युफैक्चरिंग अपग्रेड पर फोकस करना चाहिए।

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