Saturday, September 23, 2017
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RBI ने MSMEs को ऋण देने के लिए बैंकों से किया आग्रह, कहा लघु उद्योग ही लोन बुक में लायेंगे सुधार


भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) के लिए ॠण प्रक्रिया को आसान बनाने का काम कर रही है। लघु उद्योगों को बेहतर ऋण सुविधा देने लिए केंद्रीय बैंक ने बड़ी बातें कहीं हैं। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर एस एस मुंद्रा ने कहा है कि उधारदाताओं को बड़े ऋण की अपेक्षा छोटे ऋण…


भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) के लिए ॠण प्रक्रिया को आसान बनाने का काम कर रही है। लघु उद्योगों को बेहतर ऋण सुविधा देने लिए केंद्रीय बैंक ने बड़ी बातें कहीं हैं।

आरबीआई के डिप्टी गवर्नर एस एस मुंद्रा ने कहा है कि उधारदाताओं को बड़े ऋण की अपेक्षा छोटे ऋण के जरिए छोटे उद्यमों पर ध्यान देना चाहिए। लघु उद्योग बैंक ऑफ इंडिया (सिडबी) द्वारा आयोजित किए गए एक समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों के बैंकिंग उद्योग के क्रेडिट परिदृश्य को गौर से देखने पर मालूम होता है कि बैंकिग इंडस्ट्री की क्रेडिट ग्रोथ धीमी होने की वज़ह बड़े औद्योगिक सेक्टर हैं। इसीलिए एमएसएमई पर ध्यान देने से हमारी लोन बुक में सुधार आएगा।

उन्होंने कहा कि बैंकिंग उद्योग की मजबूती के लिए एमएसएमई क्षेत्र को महत्व देने के कई तर्कसंगत कारण हैं। क्योंकि बड़े औद्योगिक ऋण में अपार समस्याएं हैं और बैंक केवल रिटेल कर्ज पर निर्भर नहीं कर सकते हैं।

उपभोक्ता ऋण सार्थक तभी होगा जब ऋण ग्रहण करने वाला उसको सही अवधि में चुकाने में सक्षम हो।

डिप्टी गवर्नर ने कहा कि हालांकि इस में कोई संदेह नहीं है कि विश्व स्तर पर केवल 30 प्रतिशत एमएसएमई 10 वर्षों से ज्यादा जीवित रहती हैं। जिनकी असफलता की मुख्य वज़ह वित्त प्राप्त करते समय होने वाली वित्तीय समस्याएं हैं।

देश में करीब 5 करोड़ एमएसएमई इकाइयां हैं जिसने लगभग 11 करोड़ लोगों को रोजगार मिलता है। एमएसएमई उत्पादन में लगभग 45 प्रतिशत योगदान करते हैं और देश के निर्यात में इनका योगदान करीब 40 प्रतिशत हैं। देश की जीडीपी में भी इस सेक्टर का योगदान लगभग 9 प्रतिशत है।

गवर्नर ने कहा कि अगर बैंक एमएसएमई को लोन लेते समय होने वाली परेशानियों को कम करने की दिशा में काम करते हैं तो हमारी लोन वितरण के ग्राफ में सुधार संभव है और एमएसएमई सेक्टर भी विकास की राह में तेजी से बढ़ेगा।

गौरतलब है कि कुछ समय पहले डिप्टी गवर्नर ने पारम्परिक बैंकों को नए जमाने के डिजिटल बैंक के रूप में बदलने की बात भी कही थी ताकि वे परिचालन जारी रख सकें। क्योंकि वित्तीय प्रौद्योगिकी (फिनटेक) युक्त ऋण मुहैया कराने वाली कंपनियां सूक्ष्म, छोटे और मझोले उद्योगों (एमएसएमई) के वैकल्पिक स्रोत के रूप में तेजी से उभर रही है।

तब मुंद्रा ने कहा था कि डिजिटल बैंकिंग के बिना बैंकों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।

(With Inputs from Business Standard)

Shriddha Chaturvedi
ख़बरें ही मेरी दुनिया हैं, हाँ मैं पत्रकार हूँ
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