Sunday, July 23, 2017
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सिडबी ने MSMEs के लिए शुरू किया प्रमाणित ऋण परामर्शदाता कार्यक्रम, लोन से जुड़ी हर समस्या का हल देगा


सर्टिफाइड क्रेडिट काउंसलर्स प्रोग्राम के तहत प्रोफेशनल सलाहकार कारोबारियों को आसानी से लोन प्राप्त करने के उपाय बताएंगे। सलाहकार कारोबारियों को लोन के लिए बैंकों के पास आवेदन देने, वित्तीय दस्तावेज बनाने, बिजनेस प्रपोजल तैयार करना जैसी मुख्य बातों की जानकारी देंगे।


भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) ने एमएसएमई के लिए प्रमाणित ऋण परामर्शदाता (क्रेडिट काउंसलर्स) कार्यक्रम लॉन्च किया है।

प्रोग्राम को आरबीआई के उप-गवर्नर एस एस मुद्रा द्वारा शुरु किया गया है। मुद्रा ने इस अवसर पर कहा कि बैंकों को छोटे कारोबारियों को ज्यादा लोन देने पर ध्यान देना चाहिए।

गवर्नर ने एमएसएमई के ऋण प्रवाह बढ़ाने के लिए नए उपकरण और समाधान विकसित करने के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सीएससी एमएसएमई ऋण उम्मीदवारों और उधारदाताओं के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में विकसित होगा।

सर्टिफाइड क्रेडिट काउंसलर्स प्रोग्राम के तहत प्रोफेशनल सलाहकार कारोबारियों को आसानी से लोन प्राप्त करने के उपाय बताएंगे। सलाहकार कारोबारियों को लोन के लिए बैंकों के पास आवेदन देने, वित्तीय दस्तावेज बनाने, बिजनेस प्रपोजल तैयार करना जैसी मुख्य बातों की जानकारी देंगे।

सीसीसी व्यवस्था के अधीन उद्यमियों को निम्न सहायता मिलेगी:

व्यावसायिक प्रस्ताव तैयार करने में सहायता।

वित्तीय दस्तावेज़ और वित्तीय विवरणियाँ तैयार करने में सहायता।

बाज़ार में उपलब्ध समुचित ऋण लिखतों से संबंधित सूचनाएँ साझा करने और गैर-वित्तीय या अर्द्ध-वित्तीय व्यावसायिक निर्णयों, जैसे व्यवसाय विस्तार योजनाओं, में सहयोग के माध्यम से परामर्श।

बैंकों की ओर से प्रारंभिक ऋण मूल्यांकन और बैंकों /ऋण-संस्थाओं द्वारा अपेक्षित अतिरिक्त समर्थक सूचनाओं का तुलनात्मक विवरण भी उपलब्ध कराया जाएगा।

गौरतलब है कि एमएसएमई क्षेत्र ऋण प्राप्त करने तथा अवसरों को व्यवसाय में बदलने के लिए अनेक चुनौतियाँ का सामना करता है। चौथी एमएसएमई संगणना के अनुसार, केवल 7% एमएसएमई उद्यम ही सांस्थानिक एवं गैर-सांस्थानिक स्रोतों से वित्तीयन का सदुपयोग करते हैं। यह इस क्षेत्र में ऋण उपलब्धता के संबंध में मौजूद काफी व्यापक अवसरों को दर्शाता है।

सीसीसी सेवाओं के विस्तार के लिए सिडबी द्वारा संचालित डिजिटल समाधान पोर्टलों (www.standupmitra.in, www.udyamimitra.in) को इससे जोड़ा जाएगा।

सीसीसी ऋण कार्यक्रम के जरिए उद्यम विकास की राह में तेज गति से आगे बढ़ेगे।

एमएसएमई को वित्तीय सहायता देने में अन्य ऋणदाताओं के साथ साझेदारी की अपनी रणनीति के एक हिस्से के रूप में सिडबी ने विजया बैंक और कैपिटल स्मॉल फाइनेंस बैंक लि. के साथ समझौता ज्ञापन भी साइन किए हैं।

इस अवसर पर संबोधित करते हुए सिडबी के उप प्रबंध निदेशकों श्री अजय कुमार कपूर एवं श्री मनोज मित्तल ने सदन को अवगत कराया कि बैंक एक उदीयमान बाज़ार में सांस्थानिक समाधान प्रदान करने में रत है।

उन्होंने कहा कि सिडबी अपने विभिन्न रणनीतिक प्रयासों के माध्यम से एमएसएमई क्षेत्र में ऋण का प्रवाह मजबूत बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहा है।

एमएसएमई उद्यमों द्वारा जीएसटी अपनाए जाने में उनकी मदद करने के लिए सिडबी-एफआईएसएमई की. www.gst4msme.com हाल में ही शुरू किया गया ऐसा ही एक प्रयास है।

भारत सरकार की कई योजनाओं जैसे मेक इन इंडिया, स्टार्ट अप इंडिया, मुद्रा आदि में सहयोग की दृष्टि से सिडबी ने बड़ी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उदाहरण के लिए मेक इन इंडिया कार्यक्रम के मामले में सिडबी ने 2016 में 10,000 करोड़ का ‘सिडबी मेक इन इंडिया सॉफ्ट लोन फंड फॉर एमएसएमई (स्माइल)’ स्थापित किया।

सिडबी के विकासपरक सहयोग से एमएसएमई क्षेत्र की 80,000 से अधिक इकाइयों की स्थापना में मदद हुई है। इससे 1.5 लाख रोजगार सृजित हुए हैं और 2.3 लाख से अधिक लोग लाभान्वित हुए हैं।

बैंक ने भारत सरकार के स्टैंड-अप इंडिया कार्यक्रम के लिए कतिपय पोर्टल, जैसे – smallB.in, sidbistartupmitra.in, www.standupmitra.in और एक सार्वभौमिक ऋण पोर्टल के रूप में www.udyamimitra.in सहित विभिन्न डिजिटल उपाय प्रारंभ किए हैं। इन मित्र पोर्टलों का लक्ष्य वित्तीय एवं गैर-वित्तीय सेवाओं तक एमएसएमई उद्यमों की पहुँच सुगम बनाना है।

इन पोर्टलों में विश्वसनीय संपर्क-सूत्र उपलब्ध हैं (आवेदनपत्र भरने, परियोजना रिपोर्ट तैयार करने, ईडीपी, कौशल उन्नयन कार्यक्रम, आदि के लिए देशभर में 1.25 लाख बैंक शाखाओं तथा 17000+ हैंडहोल्डिंग एजेंसियों तक पहुँच)।

पोर्टल में 50322 पंजीकरण किए जा चुके हैं और 352 ज़िलों के 1990 नए उद्यमियों को ऑनलाइन मंजूरियाँ प्रदान की जा चुकी हैं।

उन्होंने यह भी सूचित किया कि बैंक ने 1120 करोड़ रुपये का पर्याप्त लाभ दर्ज़ किया है। वर्ष के दौरान, बैंक की सकल गैर-निष्पादक आस्तियों का प्रतिशत 1.51 प्रतिशत से घटकर 1.2 प्रतिशत हो गया, जबकि निवल गैर-निष्पादक आस्तियों में सुधार हुआ और वे पिछले वर्ष के 0.73 प्रतिशत से 0.44 प्रतिशत हो गई।

Shriddha Chaturvedi
ख़बरें ही मेरी दुनिया हैं, हाँ मैं पत्रकार हूँ
http://www.SMEpost.com

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