Saturday, September 23, 2017
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उत्तर प्रदेश: 1 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देने वाले सेक्टर MSMEs ने मांगी अलग पॉलिसी, नई नीति में नहीं मिली व्यापक जगह


अध्ययन में एक रोचक तर्क देते हुए एसोसिएशन ने कहा है यदि राज्य में 5 व्यक्तियों का एक औसत परिवार माने, और लगभग 1 करोड़ 14 लाख लोगों को एमएसएमई सेक्टर से रोजगार मिलता है, इस तरह उत्तर प्रदेश में एमएसएमई क्षेत्र 5.7 करोड़ जनसंख्या को पोषित कर रहा है। जो कि राज्य की कुल आबादी का एक चौथाई से अधिक है।


इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ने उत्तर प्रदेश सरकार से एमएसएमई के लिए अलग से नीति की मांग की है।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक खबर के अनुसार सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की शीर्ष प्रतिनिधि इकाई इंडियन इंडस्ट्रीज़ एसोसिएशन (आईआईए) ने राज्य की नई औद्योगिक निवेश और रोजगार नीति 2017 का अध्ययन किया और पाया कि यह नीति लघु उद्योगों के बज़ाय बड़े उद्योगों की तरफ अधिक झुकी हुयी है।

अध्ययन में कहा गया है कि बड़े पैमाने पर उद्योगों की बजाय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करता है। राज्य में विनिर्माण उत्पादन और निर्यात के मामले में एमएसएमई क्षेत्र का योगदान बड़े क्षेत्र के बराबर है।

स्टडी में कहा गया है कि बड़े उद्योगों की तुलना में एमएसएमई क्षेत्र को अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है जो 4 जुलाई, 2017 को घोषित हुयी मौजूदा नीति से लगभग गायब है।

आईआईए ने मांग की है कि उत्तर-प्रदेश की एमएसएमई ईकाइयों के विकास के लिए अलग से एमएसएमई डेवलपमेंट पॅालिसी का गठन किया जाए। राज्य में 50 लाख से ज्यादा एमएसएमई ईकाइयां हैं जिनसे 1 करोड़ से अधिक लोगों को रोज़गार मिलता है।

अध्ययन में एक रोचक तर्क देते हुए एसोसिएशन ने कहा है यदि राज्य में 5 व्यक्तियों का एक औसत परिवार माने, और लगभग 1 करोड़ 14 लाख लोगों को एमएसएमई सेक्टर से रोजगार मिलता है, इस तरह उत्तर प्रदेश में एमएसएमई क्षेत्र 5.7 करोड़ जनसंख्या को पोषित कर रहा है। जो कि राज्य की कुल आबादी का एक चौथाई से अधिक है।

इस तरह एमएसएमई क्षेत्र आर्थिक प्रगति और राज्य के समग्र विकास की रीढ़ है। राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में उत्तर प्रदेश का योगदान 8.4% है। जो कि कुल आबादी का 16.5% है।

आईआईए का कहना है कि उत्तर प्रदेश में एमएसएमई क्षेत्र में सुधार के लिए काफी संभावनाएं हैं और एमएसएमई के तहत ही विकास को बढ़ाया जा सकता है।

एसोसिएशन ने व्यापारियों के पसंदीदा राज्य जैसे गुजरात, हरियाणा और पंजाब राज्यों की स्वीकृत नीतियों के अध्ययन के आधार पर आईआईए ने मसौदा तैयार किया है। जिसे राज्य के नव नियुक्त मुख्य सचिव राजीव कुमार को सौंप दिया गया है।

आईआईए ने एमएसएमई और प्रिंसिपल प्रमोशन के प्रमुख सचिव के साथ हुई बैठक में उद्योग बंधु (उत्तर प्रदेश सरकार) के कामकाज पर भी चिंता जताई थी। आईआईए ने उल्लेख किया कि यह ध्यान देने वाली बात है कि उद्योग नीति में उद्योग बंधु के कामकाज में सुधार का कोई जिक्र नहीं है।

ऑनलाइन एकल खिड़की निकासी प्रणाली जिसे यूपीए सरकार के लिए 2006 में आईआईए द्वारा डिजाइन किया गया था। एमएसएमई की जरूरतों और बड़े निवेशों और उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप है।

आईआईए ने एमएसएमई की समस्याओं के समाधान के साथ-साथ एमएसएमई के लिए ऑनलाइन एकल तालिका प्रणाली को फिर से स्थापित करने के लिए ऑनलाइन सिस्टम को फिर से डिज़ाइन करने के लिए प्रमुख सचिव एमएसएमई और एक्सपोर्ट पदोन्नति को एक प्रस्ताव दिया है।

(With Inputs from Times of India)

Shriddha Chaturvedi
ख़बरें ही मेरी दुनिया हैं, हाँ मैं पत्रकार हूँ
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