Saturday, September 23, 2017
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उत्तर प्रदेश: नई औद्योगिक नीति में MSMEs ने माँगा बेहतर प्रतिनिधित्व


उत्तर प्रदेश की नई औद्योगिक नीति को योगी-आदित्यनाथ सरकार की कैबिनेट से सहमती मिलने के बाद एमएसएमई क्षेत्र ने राज्य सरकार से एक विशेष नीति सेक्टर के लिए तैयार करने की अपील की है। इंडस्ट्री के लोगों ने इस नीति में एमएसएमई को बेहतर तरीके से शामिल करने की मांग की है। उनका कहना है…


उत्तर प्रदेश की नई औद्योगिक नीति को योगी-आदित्यनाथ सरकार की कैबिनेट से सहमती मिलने के बाद एमएसएमई क्षेत्र ने राज्य सरकार से एक विशेष नीति सेक्टर के लिए तैयार करने की अपील की है।

इंडस्ट्री के लोगों ने इस नीति में एमएसएमई को बेहतर तरीके से शामिल करने की मांग की है। उनका कहना है कि राज्य के विनिर्माण उत्पादन में एमएसएमई का प्रदर्शन बहुत अच्छा है।

एमएसएमई की देश में अपेक्स बॉडी इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) ने इस क्षेत्र की जमीनी हकीकत पर चर्चा करते हुए एक मसौदा प्रस्ताव तैयार किया है। जो इस क्षेत्र के विकास में मदद करेगा।

व्यापारियों के पसंदीदा राज्य जैसे गुजरात, हरियाणा और पंजाब राज्यों की स्वीकृत नीतियों के अध्ययन के आधार पर आईआईए ने यह मसौदा तैयार किया है। जिसे राज्य के नव नियुक्त मुख्य सचिव राजीव कुमार को सौंप दिया गया है।

उद्योग संगठनों का कहना है कि राज्य में लगभग 50 लाख से अधिक एमएसएमई ईकाइयां हैं। जिनसे लगभग 1 करोड़ 20 लाख लोगों को रोजगार मिलता हैं। राज्य के ‘ब्रांड यूपी’ और ‘मेक-इन-यूपी’ दृष्टि को सफल बनाने में एमएसएमई की महत्वपूर्ण भूमिका है।

देश की समग्र अर्थव्यवस्था में उत्तर प्रदेश का योगदान 8.4 प्रतिशत है। जबकि इसकी आबादी भारत की कुल आबादी का लगभग 16.5 प्रतिशत है।

इस संदर्भ पर आईआईए ने योगी सरकार को नौकरियों का सृजन करने, आय के स्तर में वृद्धि और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में राज्य के योगदान को बढ़ाने के लिए एमएसएमई क्षेत्र को बढ़ावा देने का सुझाव दिया है।

Shriddha Chaturvedi
ख़बरें ही मेरी दुनिया हैं, हाँ मैं पत्रकार हूँ
http://www.SMEpost.com

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