Saturday, September 23, 2017
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क्यों! हार्वर्ड और IMF की नज़र में भारत ही रहेगा अगले एक दशक तक पूरी दुनिया में आर्थिक विकास का केंद्र बिंदु


हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर इंटरनैशल डेवेलपमेंट विभाग (CID) ने 2025 तक तेजी से अर्थव्यवस्था बढ़ने वाले देशों की सूचि में भारत को प्रथम स्थान पर रखा है। रिसर्च में बताया गया है कि भारत की अर्थव्यवस्था औसतन 7.7 प्रतिशत के हिसाब से विकासगति की तरफ बढ़ेगी जिसके कई कारण हैं।


कई आर्थिक सुधारों और लगातार तेजी से विकास कर रही अर्थव्यवस्था की वजह भारत वैश्विक पटल सभी देशों को पीछे छोड़ चूका है। शायद यही वजह है कि भविष्य में काफी लम्बे वक़्त तक भारत दुनिया की सबसे तेजी से विकसित अर्थव्यस्था बना रहेगा। एक अनुमान के मुताबिक अगले एक दशक तक उसके इस वर्चश्व को कोई चुनौती नहीं दे पायेगा।

अमेरिका स्थित विश्व प्रसिद्द हार्वर्ड विश्वविद्यालय नें अपने एक शोध में कहा है कि भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था का दौड़ में चीन से आगे निकल चुका है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर इंटरनैशल डेवेलपमेंट विभाग (CID) ने 2025 तक तेजी से अर्थव्यवस्था बढ़ने वाले देशों की सूचि में भारत को प्रथम स्थान पर रखा है। रिसर्च में बताया गया है कि भारत की अर्थव्यवस्था औसतन 7.7 प्रतिशत के हिसाब से विकासगति की तरफ बढ़ेगी जिसके कई कारण हैं।

हाल ही में इंटरनेशनल मॅानिटरी फंड (आईएमएफ) ने भी भारत को विश्व में तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाले देशों में बताया है। आईएमएफ के अनुसार भारत ने जितने आर्थिक सुधार किये हैं उनकी वजह से उसके विकास में सुधार हो रहा है। साथ ही इन आर्थिक सुधारों की वजह से ही अर्थव्यवस्था पर नोटबंदी अर्थात विमुद्रीकरण का ज्यादा फर्क नहीं पड़ा।

हार्वर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा आर्थिक वृद्धि के बारे में अपने अनुमान में बताया गया है कि वैश्विक आर्थिक गतिविधियों का मुख्य केंद्र बिंदु चीन का पड़ोसी देश भारत बन गया है। जिसके आने वाले समय में इस स्थान पर बने रहने की संभावन चीन की अपेक्षा अधिक है।

रिपोर्ट मे कहा गया है कि विकसित देश की ग्रोथ दर विकासशील देशों की तुलना में कुछ धीमी गति से बढ़गी। पूर्वी अफ्रीका, इंडोनेशिया और वियतनाम की अगुवाई में दक्षिणी पूर्व एशिया के नए केंद्र बनने की उम्मीद है।

शोधकर्ताओं ने भारत की तीव्र वृद्धि के व़जह नए क्षेत्रों में विविधीकरण होना बताया है। जिसमें भारत का अपने निर्यात में विविधता पर जोर देना शामिल है। भारत ने अपने निर्यात कारोबार को रसायन, वाहन और कुछ तरह के इलेक्ट्रॉनिक्स सामानों जैसे जटिलता वाले क्षेत्रों में आगे बढ़ाया है।

शोध में इस बात को भी कहा गया है कि भारत, इंडोनेशिया और वियतनाम ने विविधता के लिए अपनी नई क्षमताओं को विकसित किया है और कई तरह के उत्पादन की वजह से आने वाले सालों में ये देश विकास को पकड़ेगे।

हार्वर्ड विश्वविद्यालय के मुताबिक भारत, तुर्की, इंडोनेशिया, यूगांडा और बल्गारिया जैसे तेजी से विकास की संभावनाओं वाले देश राजनीतिक, संस्थागत, भौगौलिक और जनसांख्यिकीय सभी आधारों पर विविधता रखने वाले हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दशक में 4.4 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि का अनुमान चीन की वर्तमान वृद्धि के रुख के समक्ष काफी उल्लेखनीय है।

यूनीवर्सिटी की रिसर्च में देशों को 3 मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है। पहली श्रेणी में वे देश हैं जो थोड़े से ही सुधार से अपने उत्पादों में विविधता ला सकते हैं। दूसरी श्रेणी में वे देश हैं जिनके पास समस्याओं का समाधान करने की पर्याप्त क्षमताएं है। जिसके चलते वे आसानी से अपने ग्रोथ में विविधता ला सकते हैं। इसमें भारत, इंडोनेशिया और तुर्की शामिल हैं। तीसरी श्रेणी विकसित देशों की है जिनकी अर्थव्यवस्था की रफ़्तार धीमी रहेगी।

आईएमएफ ने कहा है कि विमुद्रीकरण जैसे बड़े बदलाव के बावजूद भारत की इक्नॅामिक ग्रोथ बुक में वृद्धि हुयी है। लेकिन कॉर्पोरेट ऋण और बैंकिंग सिस्टम की कमजोरियां जस की तस हैं।

भारत और चीन समेत उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं की स्थित को देखते आईएमएफ ने कहा है कि भारत में अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोण से सुधार हुआ है।

वहीँ चीन के ताजा आंकड़े से उसके निर्यात में गिरावट दिखती हैं। चीन की आर्थिक रैंकिंग चार पायदान गिरी है। उसकी 4.4 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि का अनुमान आने वाले समय में लगाया गया है।

 

Shriddha Chaturvedi
ख़बरें ही मेरी दुनिया हैं, हाँ मैं पत्रकार हूँ
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