Saturday, September 23, 2017
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भारत और इजराइल मिलकर स्टार्टअप की नैया करेंगे पार!


भारत और इजरायल में 2025 तक स्टार्टअप में 25 अरब डॉलर के निवेश से विभिन्न क्षेत्रों के 25 वैश्विक स्तर के उत्पाद सृजित हो सकते हैं। इन उत्पादों से 2025 तक 25 अरब डॉलर की आय सृजित होने की संभावना है।


भारत और इजरायल में स्टार्टअप में संचयी रूप से निवेश के जरिए 25 अरब डॉलर का राजस्व सृजित हो सकता है। नैसकॉम और एक्सेंचर की संयुक्त रिपोर्ट में ये बातें कही गई है। कॉलोबोरेटिव इनोवेशन : द व्हीकल ड्राइविंग इंडो-इजरायल प्रॉसपैरिटी शीर्षक से जारी रिपोर्ट के अनुसार भारत और इजरायल का नवप्रवर्तन माहौल तीन क्षेत्रों मिजाज, प्रतिभा और प्रौद्योगिकी में नवप्रवर्तन अनुपूरक विशेषताओं को साझा करता है।

यह रिपोर्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल की तीन दिन की यात्रा के बीच आई है। किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली इजरायल यात्रा है। इसमें कहा गया है कि भारत और इजरायल में 2025 तक स्टार्टअप में 25 अरब डॉलर के निवेश से विभिन्न क्षेत्रों के 25 वैश्विक स्तर के उत्पाद सृजित हो सकते हैं। इन उत्पादों से 2025 तक 25 अरब डॉलर की आय सृजित होने की संभावना है।

रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि पूरक शक्तियों के पूरी तरह उपयोग के लिए भारत और इजरायल को प्रणालीगत रुख और संस्थागत मसौदे की जरूरत है।

आईएआई संग विप्रो की इकाई का करार

विप्रो एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड की इकाई इन्फ्रास्ट्रक्चर इंजीनियरिंग (डब्ल्यूआईएन) और इजरायल की एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (आईएआई) साथ मिलकर कम्पोजिट एयरोस्ट्रक्चर पार्ट्स बनाने के लिए एक फैक्टरी लगाएंगी और वैश्विक विमान निर्माता कंपनियों के लिए इसकी असेंबलिंग करेंगी।विप्रो एंटरप्राइजेज दो प्रमुख कारोबार कंज्यूमर केयर और इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग व एयरोस्पेस पर ध्यान केंद्रित कर रही है। दोनों कंपनियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा के दौरान बुधवार को रणनीतिक गठजोड़ का ऐलान किया।

कंपनी ने एक बयान में कहा, इस फैक्टरी में वैश्विक बाजार के लिए भारत में कम्पोजिट ढांचा बनाया जाएगा और आईएआई व अन्य ओईएम के अलावा टियर-1 सप्लायर के अनुपालन का समाधान करेगा ताकि ऑफसेट नीति संबंधी भारत के रक्षा मंत्रालय के दिशानिर्देश को पूरा किया जा सके।

भारत की ऑफसेट नीति में वैश्विक सैन्य साजोसामान बेचने वाली कंपनियों को 300 करोड़ रुपये ज्यादा सौदे में इसकी कीमत का 30 फीसदी सामान देश की स्थानीय कंपनियों से लेना अनिवार्य है। इसका लक्ष्य स्थानीय स्तर पर एयरोस्पेस व रक्षा आपूर्ति की व्यवस्था करना है, जो वैश्विक फर्मों के साथ-साथ देसी बाजार को सेवाएं दे सके।

बेंगलूरु में देश का पहला एक्युएटर मैन्युफैक्चरिंग केंद्र बनाने वाली विप्रो को उम्मीद है कि एयरोस्पेस इंडस्ट्री भविष्य में रणनीतिक होगी।

शोध के लिए गठजोड़ 

विप्रो और रामोट ने उभरती प्रौद्योगिकी में संयुक्त शोध के लिए भागीदारी की घोषणा बुधवार को की। रामोट तेल अवीव विश्वविद्यालय (टीएयू) में बिजनेस एंगेजमेंट सेंटर Þ है। टीएयू उच्च शिक्षा के लिए इजरायल का सबसे बड़ा केंद्र हैं। वहां विज्ञान, इंजीनियरिंग और कला समेत विभिन्न विभागों के 125 से अधिक स्कूल हैं। कंपनी की विज्ञप्ति के अनुसार यह भागीदारी विश्वविद्यालय में संयुक्त शोध क्षमता के सृजन पर जोर देता है।

जीडब्ल्यूआरएल का एरो-टी संग करार 

टेक्निकल टेक्सटाइल विनिर्माता गरवारे-वॉल रोप्स लि (जीडब्ल्यूआरएल) ने इजरायल की एरो-टी के साथ भारत के रक्षा क्षेत्र के लिए आधुनिक एरोस्टैट के विनिर्माण और आपूर्ति के लिए करार किया है। बीएसई को भेजी सूचना में जीडब्ल्यूआरएल ने एरो-टी के साथ सहमति ज्ञापन पर दस्तखत की घोषणा की है।

कंपनी ने भारत के रक्षा क्षेत्र के लिए आधुनिक एरोस्टैट के विनिर्माण और आपूर्ति के लिए अपनी क्षमताओं को जोडऩे की मंशा जताई है। इस सहयोग के जरिए जीडब्ल्यूआरएल एरोस्टैट एन्वेलप उत्पादन सुविधा तैयार करेगी। एरो-टी इसके लिए प्रौद्योगिकी उपलब्ध कराएगी।

Source: Business Standard

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